वतन के हैं दीवाने

( वतन के है दीवान )

वतन के हैं दीवाने 
वतन पे है कुर्बान
वतन पे जान लुटा दे
वतन है मेरी जान (2)

सुन के तेरी गाथा
सीना चौड़ा हो जाता
वो विरो का बलिदान
सुनके आंसू आता
मां धरती चरणों में
नित रोज शीश झुकाते 
शहीदों की भूमि है
शहीदों की महिमा गाते

वतन के हैं दीवाने 
वतन पे है कुर्बान
वतन पे जान लुटा दे
वतन है मेरी जान 

एक जान है क्या
सो सो जान लुटा दे
आंधी और तूफा में
हम तिरंगा लहरादे 
आंख जो तुझ पे उठाए
ये बर्दाश्त नहीं है
देश है तू सबसे पहले
और कुछ खास नहीं है

वतन के हैं दीवाने 
वतन पे है कुर्बान
वतन पर जान लुटा दे
वतन है मेरी जान    ( जय हिंद ) 🇮🇳






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